जैसा दिल का आईना। 
वैसे मन के भाव। 
जैसी चहेरे पर नजर।
वैसा दिखे नजरिया। 

दया भाव है मन के अन्दर ।
दया चहेरे पर दिखती है।
हसी से भरी है ज़िन्दगी। 
चहेरे पर खिलखिलाहट दिखती है।

यदि अन्दर से ही घृणित है। 
चेहरा खौफनाक दिखता है ।
गुस्सा भी उसका एक रूप है। 
वह चहेरा पर छलकता है।

रखना है चहेरा दमकता। 
प्रभु का रूप मन में समा लेना ।
देखो फिर सकारात्मक।
ऊर्जा चहेरे से निकलती हैं। 

नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया )🌹🌹