प्रेम ईश्वर है दिल की गहराइयों में समाया है,
प्रेम शिव है तभी तो अर्धनारीश्वर बन पाया है,
 प्रेम मुरली की धुन में है जिसकी धुन ने--- 
कृष्ण को राधा से मिलाया है,
प्रेम एक इत्र है जिसकी सुगंध से---
 संपूर्ण संसार महक पाया है,
 प्रेम माँ है जिसने अपने बच्चों पर निस्वार्थ भाव से--- 
अपना सर्वस्व जीवन लुटाया है,
सत्य प्रेम में अटूट संबंध होता है,
ना पाने की लालसा ना बिछड़ने का गम होता है,
 यह तो दिल की गहराइयों में होता है, 
जिसे दिखाया नहीं जाता दुनिया को जताया नहीं जाता, सिर्फ महसूस किया जाता है,
प्रेम में स्वार्थ नहीं होता प्रेम निस्वार्थ होता है,
 जरूरी नहीं प्रेम को पाया जाए, प्रेम में खोना भी होता है, मर्यादा सहनशीलता में रहकर भी प्रेम को पाना होता है,
प्रेम सांसारिक मोह से अंजाना होता है,
 प्रेम का प्रकाश चारों दिशाओं में छाया है,
 इधर उधर क्यों ढूंढे यह दिल की गहराइयों में समाया है, आंखें बंद करके भी इसका प्रकाश नजर आया है,
प्रेम शरद में धूप है ग्रीष्म में शीतल सी छाया है,
 प्रेम हर क्षण में है कण कण में है,
 प्रेम गंगा नदी की धारा है,सूरज का उजियारा है,
 समस्त सृष्टि के रचीयता परमात्मा ने प्रेम बनाया है,
प्रेम ईश्वर है दिल की गहराइयों में समाया है



संगीता वर्मा✍✍