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मंगल गान मगन जग मूरत
प्रेम सलौनी उमर की सूरत
आँगन है छल-छल हूंकारी
नाचत मोर मगन बारी-बारी
जल की की राश चंचल की मोती
राह निहारे चंदन की साज़
उम़र नयन की ललक भरी है
बिस्तर मोम ममता की लाज़
सुंदर सचित्र वर्णन माला में
वंदन करत रहीं आकाश
ममता की जल से पाऊँ पखारे
प्यार की ये सुंदर प्रकाश
लेखक:-विकास कुमार लाभ
मधुबनी(बिहार)

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