बेटी के विवाह के लिए चिंतित पिता से बेटी ने कहा---

" पिताजी आप विवाह में दहेज बिल्कुल मत देना।
  मेरे  लिए  एक सुयोग्य  और  सुशील  वर ढूंढना।"

इस पर पिता हंसकर बोले --
"बिना दहेज सुयोग्य, सुशील वर कहां मिलता है।
बेटी! इसके लिए बहुत मोटा रकम, गिनना पड़ता है।
विवाह पूर्व लड़कों की ऊंची-उँची बोली लगती है।
पास में ढेरों रुपये हों तब जाकर कहीं बात बनती है। " 

कम दहेज, मध्यम लड़का !
मोटा दहेज उत्तम लड़का!
क्लास वन लड़का है तो एकदम हाई रेट।
डॉक्टर है तो मुंह मांगा दहेज।
एक पिता को कंगाल बनना पड़ता है।
तब कहीं जाकर सुयोग्य वर मिलता है।

ये सुन बेटी हंसी और बोली  -----
विवाह पूर्व चढ़ा लेते ये आवरण ,
अपने कुटिल चेहरे पर ।
बातें करते,अति विनीत स्वर में हंसकर।
असलियत तो बाद में खुलती है ।
तब तक  बहुत देर हो चुकी होती है।
मां बाप को तकलीफ़ न हो,
इसलिये बेटियां सब सहतीं हैं।
लेकिन अपना मुंह नहीं खोलती।
हां कभी-कभी कोई बेटी थोड़ा बोल देतीहै।
अत्याचार के खिलाफ अपना सिर उठाती है।।
लेकिन वह ये भी जानती,
इसका कोई परिणाम नहीं निकलना।
उसे आजीवन  इसी तरह सहना,
इसलिए पिताजी! आप मेरे विवाह में,
दहेज बिल्कुल मत देना।
मेरे लिए बस एक कम आमदनी वाला,
ही सही लेकिन सुयोग्य वर खोजना।

        स्नेहलता पाण्डेय
         नई दिल्ली