वो पीले फूल "हा ये तो अमलतास का पेड है"कितने ही प्यारे फूल है"नीरू अपनी ही उन्माद मे खो गई,
हा बिल्कुल चटक बिल्कुल सरसो के फूलो जैसे,मधु प्रत्युत्तर मे बोली """""तू भी सब मजा किरकिरा कर देती है ।
फिर दोनो एक दूसरे को देखकर खिल खिलाकर हँस पडी।
उनकी उन्मुक्त हँसी ,किसी की धडकनो मे हलचल मचा रही थी।जिससे वो दोनो बेखबर ,अपनी ही र,वानी मे मदमस्त बह रही थी।उम्र का वो पडाव ,जहा कुछ स्थिर नही,
कुछ दूर पेडो की ओट मे खडा प्रणव, उन्हे अपलक देखे जा रहा था।
मधु ,की आहट से ही,प्रणव की धडकने बढ जाती"
पर मधु इन बातो से अंजान ,नीरू के साथ अपनी ही मस्ती मे बह रही थी"""""
चल आज जल्दी घर पहुँच जाऐगे तो,माँ की कुछ मदद भी कर देगे"वैसे भी माँ को कल से बुखार है'नीरू बोली""
हाँ यार 'अभी वो कुछ कदम आगे बढी होगी की ,मधु ने रुकने का इशारा किया,नीरु सहम गई,उसे मधु के इशारे से सिहरन सी हो गई,मधु ने पीछे पलटकर देखा वहाँ कोई न था।""""""""
अब चल,मधु बोली,,,,,
मधु तू हमेशा मुझे डरा क्यू देती है,,,
अरे पगली ,मेरी प्यारी दोस्त मेरी जान ,इतनी डरपोक क्यूँ है,तू "चल बताती हूँ,कई दिनो से मुझे महसूस हो रहा है"कोई अपना पीछा कर रहा है"इसलिऐ इशारा किया था।
चल साॅरी बाबा"""""माफ कर दे अब नही डराऊँगी"""मधु ने कान पकड लिऐ"""""चल माफ किया नीरु हँसते हुऐ बोली""
दूर पेड की ओट मे छुपा प्रणव उन्हे ,मायूसी से जाते हुऐ देखता रहा। कृमश""""आगे जारी भाग -2-
रीमा ठाकुर
कृपया बताऐ पहला भाग कैसा लगा पाठको आगे की कहानी मोड बदलने वाली है ,हमे समीक्षा मे जरूर बताऐ
आगे क्या होना चहिऐ,रोमांस'''''""""हाॅरर '''''या कुछ और इन्तजार रहेगा आपके सुझाव का आभार🙏🏼


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