तुम ऐसी ही अच्छी हो
थोड़ी-सी झल्ली
थोड़ी-सी बेबाक़
थोड़ी-सी सरल
खुद की एक पहचान हो
खुद की परछाईं
और हिम्मत हो
और सुनो तुम ऐसी ही अच्छी हो
क्यूँ बदलना हैं तुम्हें
किसी और के लिए
अपनी ख्वाहिशों और ज़रूरतों को
जबकि तुम खुद के लिये
काफी हो
एक ज्वाला है
तुम्हारी आँख़ों में
एक चिंगारी है तुम्हारी बातों में
तुम दुनिया बदलने की ताक़त रखती हो
अपना एक अलग जहां
बनाने की हिम्मत रखती हो
और ऐसे ही रहना
क्यूँकि तुम ऐसी ही अच्छी हो
कभी ज़िंदगी में थक जाओ तो
आराम कर लेना
लेकिन कभी हार मत मानना
और ज़िंदगी को अपनी शर्तों पर जीना
समर्पण की अत्फ़ में
कभी खुद को क़ुर्बान मत करना
रख हौंसला तू फिर एक नई परवाज़ भरना
और आए कभी इम्तिहान की घड़ी
तो डटकर कर उसका सामना करना
और
एक बात हमेशा ध्यान रखना
ताउम्र ऐसी ही रहना
क्यूँकि तुम ऐसी ही अच्छी हो
थोड़ी-सी झल्ली
थोड़ी-सी बेबाक़
थोड़ी-सी सरल।।
-आरती वत्स✍🏻

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