होले होले मेरे दिल के अरमान जो जले। 
धुआं बन ऊपर उठ बादल बन गये। 

कभी-कभी बिना बुलाये ये बादल बरस जाते हैं। 
ये कहीं वही बादल तो नही। 

अशु बन उस धुएं से मेरी आँखे छलकने लगी।
बैठी जो लिखने पन्नौ पर अपनी छाप जोड़ गये।

तड़प तो कम हुई जब कोई अरमाँ ही ना बचा।
अब किस बात पर हमारा दिल क्यू बार बार जले।

दिले एतबार कर लिया हमनें। 
अब किसी से कोई शिकायत करने को बची ही नहीं। 

अपने से किया सवाल हम अब तो खुश है ना। 
ना हाँ का ना कोई ना का जबाब मिला ही नहीं।

नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया ) 🌹🌹