एक औरत के सपने ।
कहाँ होते है उसके अपने। 
कभी पति की कामयाबी। 
कभी औलाद की सफलता। 
उसमे ही कर लेती है साकार।
वह अपने सारे सपने। 
एक औरत के सपने ।
कहाँ होते है उसके अपने। 

मेरे घर को किसी की 
नज़र ना लगे। 
खुशियों से आबाद।
मेरा आशियाना रहे। 
अंजलि भर की खुआइशे।
वार देतीं अपने प्यार से ।
अपनों के ही सपने ।
उसके होते हैं सपने। 
एक औरत के सपने ।
कहाँ होते है उसके अपने।

भगवान से हर पल ।
यही दुआएं करती हैं। 
सब सुखी रहे और।
सभी रहे खुशहाल। 
इन खुशियो से भर ।
लेती अपनी झोली ।
कर लेती खुद को ।
मालामाल।
कभी बन माँ  बेटी ।
कभी बहन बनकर।
दुआओं में सबसे पहले ।
उससे होते है अपने। 
एक औरत के सपने ।
कहाँ होते है उसके अपने। 

सुबह के सपने में भी 
यही उसको है दिखता।
ना किसी को हो मेरी।
वज़ह से परेशानी। 
नींद कितनी गहरी हो।
पर अपनी जिम्मेदारी से।
मुंह नहीं मुड़ता। 
उठ खड़ी होती है ।
तोड़ अपने सपने ।
एक औरत के सपने ।
कहाँ होते है उसके अपने। 

नीलम गुप्ता🌹🌹 (नजरिया )🌹🌹