नंदिनी के पिता रविकांत जी ने वाराणसी में कमलेश जी के घर फोन लगाया –हेलो नमस्ते भाई साहब।
कमलेश जी –नमस्ते जी।
रविकांत जी(थोड़े नाराज स्वर में) – क्या जो मुझे बताया जा रहा वो सच है?और यदि हां, तो आप लोगों ने मेरी बेटी की जिंदगी क्यों खराब की?
कमलेश जी–हमें तो खुद नही पता था इस सब बातों का।पर अब जब हम जान चुके है सब ठीक हो जायेगा।
रविकांत जी–कैसे ठीक हो जायेगा ?आप लोगो को ऐसा नही करना चाहिए था।
कमलेश जी–हम नीरज को समझा रहे हैं।आप नंदिनी बहु से कहना फ़िक्र न करे ,हम सब हैं न।और आप सब भी धीरज रखें आखिर ये दोनों परिवारों की इज्जत का सवाल है।अगर बात बाहर गई तो बड़ी बदनामी होगी।
माफ़ कीजिये भाई साहब–रविकांत जी कड़े शब्दों में बोले,"मेरी बेटी का दिल टुटा है।वो कुछ खा भी नही रही न ही बात कर रही ।जब से आई है बिलकुल चुप है।इतना रोइ है कि आंसू सूख गए।पर वो अकेली नही है मै हूँ मेरी बेटी के साथ ।" इतना बोलकर उन्होंने फोन कट कर दिया। वो भारी क़दमों से नंदिनी के कमरे की ओर चल पड़े और उनके पीछे पुष्पा जी भी ।देखा तो नंदू गुमसुम बैठी जमीन की और देख रही है।
उन्होने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा और कहा–मुझे माफ़ कर दे मेरी गुड़िया। मैंने सब कुछ देखा परखा पर चरित्र नही समझ पाया।
नंदिनी पापा के कंधे पर सिर रखकर रोने लगी। उनकी पलकें भी भीग गई।बोले–बस बेटा बस।अब तू नही रोयेगी।तेरे पापा का वादा है मैं सब सही करूँगा।मैं अब तुझे वहाँ नही भेजूंगा।तू आराम कर।और खुद को तकलीफ मत दे बेटा।वरना तेरा पापा जी नही पायेगा।
नही पापा ऐसा मत बोलिये।मैं नही रोऊंगी।थोड़ा समय दीजिये।मैं खुद को सम्हाल लूंगी।नंदिनी ने रोते हुए कहा।
कुछ सोचते हुए रविकांत जी बोले– बेटा मैंने फैसला लिया है कि आपके जीजाजी, बड़े पापा ,मामाजी और बुआजी से इस बारे में चर्चा करूं।और उनसे विचार विमर्श के बाद आगे की करना है यह निर्णय करूँगा।
आप जैसा ठीक समझे पापा,मुझे पता है आप सब ठीक कर दोगे–नंदिनी ने आंसू पोछते हुए कहा।
उसके सिर पर आश्वासन देते हुए हाथ रखकर रविकांत जी और पुष्पा कमरे से बाहर चले गए।
उन्होंने अपने सभी खास रिश्तेदारों को सारी बातें बताई और विचार विमर्श किया।साथ ही अपने एक वकील मित्र से भी राय मशवरा किया।
और कुछ दिनों बाद नंदिनी के पिता ने नीरज को तलाक के कागज भिजवा दिए।और साथ ही धोखा धड़ी का केस भी चला।सबूत के तौर पर वह वीडियो जो अवसर मिलते ही नंदिनी ने बना लिया था।वह पेश किया गया।
नीरज के परिवार ने कई तरह से नंदिनी को वापिस बुलाना चाहा पर गीतिका और उसके मम्मी पापा ने उसका मनोबल नही गिरने दिया।सभी रिश्तेदारों और समाज की सहानुभूति नंदिनी के साथ थी।परिवार के साथ की वजह से उसने खुद को सम्हाल लिया।मन बहलाने के लिए अपनी सहेली के साथ उसके फैशन बुटीक में ड्रेस डिजाइनर के रूप में काम करना शुरू किया।अब वह पहले से ज्यादा आत्मविश्वास से भरी हुई थी।
अंततः नीरज से उसका तलाक हो गया।पर पुष्पा जी और रविकांत जी चाहते थे कि नंदिनी अपने जीवन में आगे बढ़े। पर उसने थोड़ा समय माँगा।
लगभग 2 वर्षों बाद फिर से नंदिनी दुल्हन बनी।इस बार उसके माता पिता ने बहुत अच्छे से,सभी से पूछकर और धीरज से शुभम को वर के रूप में चुना था।पर सबके साथ हमारी नंदिनी को भी सपने देखने से डर लग रहा था क्योंकि उनने ठोकर जो खाई थी।
शादी हुई फिर से रविकांत जी ने बेटी का कन्यादान किया।और इस बार ईश्वर ने उसके जीवन में बहुत सारा प्यार ,विश्वास और सम्मान लिखा था।
(नंदिनी और शुभम की शादी की 21वर्ष बीत चुके है।नंदिनी की बेटी अब कॉलेज जाने लगी है और बेटा 10वीं में अव्वल नम्बरों से पास हुआ है।आगे भी नंदिनी (जो मेरी परिचिता हैं) का जीवन सुखमय हो ,ऐसी शुभकामना के साथ यह कहानी समाप्त करती हूं।)
कृपया कहानी के लिये अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें ,
धन्यवाद।
✍️प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

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