मैं कलयुग की नारी पिया ना में राधा न मैं सिया,
न सीता सा भाव है मुझ में ना राधा का त्याग है मुझ में ,
बनके उर्मिला पति वियोग नहीं सह सकूंगी।
वक्त आया तो सीता बनके पति के साथ वनवास जी गई,
कभी बनके राधा समर्पण कर गई सबने सहा है मैं भी सहूंगी
पर अपमान का घूंट नहीं पी सकूंगी।
वह औरत भी क्या औरत है जिसमें त्याग नहीं है,
कलयुग हो या सतयुग औरत के प्रति सबका भाव यही है,
, सिया राधा सी मैं श्रेष्ठ नहीं पर मैं भी एक औरत हूं ,
सारी व्यथा हृदय में भर लूंगी।
जानती हूं अब कोई मोहन ना आएगा
पर कोई दुशासन अब चीर हरण ना कर पाएगा
कुछ पल खुद के लिए जी लेना अगर दोष है,
मैं यह दोष अपने हृदय में धरूंगी।
जो चाहे दे दो सजा पर मैं अब ,
बहुत हो गया नही जाता सहा,
किसी भी राणा के हाथ का विष का,
प्याला अब मै नहीं पियूंगी ।
मेरा भी कुछ स्वाभिमान है ,
कुछ मेरी भी अब अरमान है ,
अपनी इच्छाओं को मारकर,
मैं घुट घुट के नहीं जिऊंगी।
पत्नी हूं तुम मान दो मुझको,
बेटी हूं तो अभिमान दो मुझको
प्रेमिका हूं तो सम्मान दो मुझको ,
मां हूं तो स्थान दो मुझको ,
गए जमाने वो अब बनकर मीरा जहर ,
जहर का प्याला नहीं पी सकूंगी ।
।बनके प्रेमिका मन को आनंदित कर दुंगी,
बनके पत्नी पथ को संचालित कर दुंगी ,
बनकर माँ जीवन को संरक्षित कर दुंगी ,
बनकर बेटी मान को सुरक्षित कर दुंगी ,
जब भी चाहोगे जिस भी रुप में मैं तुम्हें तृप्त करूँगी।
पर बिना बात मैं अब अग्नि परीक्षा नहीं दे सकूंगी।
मैं कलयुग की नारी हूं अपमान के घूंट नहीं पी सकूँगी।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।
सभी महिलाओं को महिला दिवस की बहुत बहुत बधाई🌹🌹🙏🙏

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