झांसी की वो रानी थी 
बड़ी ही सयानी थी
वीरता के उसके 
दुनियां भी सानी थी 
खेलती थी बरछी
ढाल औरकृपाण से
नाना की बहन वो 
शिवा की दीवानी थी 
झांसी,,,,,,,,,
वीरता का अवतार
करती तलवारों के वार 
माता की आराधना 
करती थी साधना
ब्याई गई झांसी में वो
झांसी की महारानी थी
झांसी,,,,,,
बुझा दीप झांसी का2
रानी शोक में समानी थी
अंग्रेजो ने झांसी को
हड़पने की ठानी थी
करके नीलामी उनने
इज्जत उछाली थी 
झांसी,,,,,,,
कुटिया में रहकर 
लड़ने की ठानी थी 
नारी शक्ति अबला ने 
सेना ये बनाली थी
झांसी,,,,,,,
पुरखो का मान रहे
सबका सम्मान रहे
झांसी वाली रानी ने
चेतना जगानी थी
नारी सेना बनके
वोकर भगानी थी
ह्यूरोज ने घेरा उसको
नाला पार ना जानी थी
झांसी,,,,,,,
घायल हुई सिंहनी
मर्दो में मर्दानी थी
जागी जोत मराठो में
युद्ध करने की ठानी थी 
रानी थी महारानी थी
झांसी की,,,,,,

संध्या पंवार राजस्थान