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🌹जय श्री कृष्ण🌹
आज फिर तेरी याद आयी, तुमसे बातों की चाहत जगी।
इसे न समझो तुम दिल्लगी, ये है मेरे दिल की लगी।।
मुझे गाना नहीं आता, मुझे गुनगुनाना नहीं आता।
तुम रूठा ना करो गुरु! मुझे मनाना नहीं आता।।
तेरा रूप सुहाना, मधुर आवाज़, मेरा साथ तेरा प्यार।
ये मौसम सुहाना, शीतल बयार तेरा साथ, मेरा प्यार।।
लेकिन फिर भी मैं गाता हूँ, आओ! मैं तुझको बुलाता हूँ।
मेरा दिल वीणा, साँसें दो तार, सुनो तुम मैं इसे बजाता हूँ।।
प्रकम्पित हुए होंठ तेरे, झंकृत सी मेरी साँसें होने लगी हैं।
आहा! मेरी दिल रूपी वीणा से सरगम निकलने लगी है।।
गीत प्रेम का, संगीत भी प्रेम का, सुरताल में गाऊँ।
ज्यों भंवरा गाये, गुनगुनाए, मैं भी कुछ यूँ गाऊँ।।
मैं एक गाना गाऊँ, एक तराना तुझे सुनाऊँ।
तुम बस सुनती जाओ और मैं गाता ही जाऊँ।।
यूँ तुझमें ही खो जाता हूँ मैं तुम्हारी प्यारी सी सूरत में।
ज्यों भजन गाते मीरा जी समा गयी कृष्ण की मूरत में।।
....✍️परमानन्द 'प्रेम'
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