"दसों दिशाएं ही मुस्काए ।
खुशियों की तरंग छा जाए
और जब मन हर्षित हो जाए
तो समझो की इश्क हो गया।
झरने सा मन कल कल गाए।
बिना बारिश ही मन हर्षाए।
मन में कोई और ना भाए।
तो समझो की इश्क हो गया।।
पत्थर भी मखमल सा भाए।
गद्दे पर भी नींद ना आए।
बिना बात तुम यूं ही मुस्काए
तो समझो की इश्क हो गया।।
हर चेहरे में वही दिखाए।
गलती पर भी क्रोध ना आए।।
झूठ में भी सच्चाई दिखाए।
तो समझो की इश्क हो गया।
दिन में होली रात दिवाली ।
पूनम रात अमावस वाली।।
मन में बिखरे भोर सी लाली।
तो समझो की इश्क हो गया।
हर मौसम तब लगे सुहाना ।
शब्दों में बन जाए तराना।
मन को भाए गज़ल या गाना।
तो समझो की इश्क हो गया।।"
अम्बिका झा ✍️

7 टिप्पणियाँ
जब जब सपनों में तुम आओ।
दृग पालकों में बंद हो जाओ।
अधरों पर स्मित से छा जाओ।
तब समझो की इश्क हो गया।