अभी क्यूँ लिखूँ मैं आखिरी खत 

अभी मेरी सांसें चल रही हैं 

जिस दिन रुकेंगी सांसें मेरी 

उस दिन मेरा आखिरी खत होगा 

अभी तो महफिलें शुरू हुई हैं 

गीत गज़लों की बरसात हुई हैं 

कैसे बुझा दूँ अभी से शमां 

अभी तो पवन मध्यम चल रही है 

जिस दिन जाऊँगा इस जहाँ से 

उस दिन मेरा सबको आखिरी खत होगा......


पवन शर्मा