बड़े मछुआरे बड़े नाव लेकर
जाते समुद्री किनारों को छोड़कर
समुद्र की गहराई में मत्स्य आखेट खेलने
उद्यमी बन खाद्य श्रृंखला की पूर्ति करने
समुद्र राज से करबद्ध विनती जोड़ते
फेंक देते मछली जाल और करते धर्य संग इंतजार
विशाल हृदय कर सागर भेंट स्वरूप देते उपहार
फंसती बड़ी, छोटी मछलियां और नन्ही मछलियां हर बार
बड़ी मछलियों के बड़े भाव तय होते
और छोटी मछलियों के कुछ छोटे
नन्ही मछलियां वापस समुद्र में लगाते होते गोते
समुद्र देव को ह्रदय से आभार जताते
किनारों की ओर फिर आते खुशियों के भाव लाते
मछुआरन बच्चों संग राह तकती
मछुआरे को आते देख खुश हो समुद्र राज को साभार जताती स्वामी के प्राणों की रक्षा और देते तुम हमको खुशहाली हो
हे समुद्र देव,हे समुद्र देव तुम हमारे जीवन रक्षक व स्वामी हो
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छोटे बांध, तालाब, झील के मुहाने पर
झोले और जाल को लेकर
छोटे-छोटे बच्चों की टोलियां
लगाकर छोटी बड़ी बेंदा और चोरिया
मग्न हो जाते खेल खेलने
मछलियों को फंसते निकलते देखते
खेल-खिलाई होती जब पूरी
और होने लगती सुरमयी सायली
तब जाते अपने आखेट खोलने
फंसी मछलियों को देखकर खुश होते
कभी कोतरी, झींगा, तो कभी टेंगना
जाल में फंस जाते आकर हरबार ना
बच्चे उसे बराबर हिस्सों में बांट लेते
फिर अपने अपने घर को निकल लेते
दादी ,मां चौंरे पर बैठ उनको आते देखते
नन्हें मछुआरे के मत्स्य आखेट को देख हर्षित होते
शाम को चांवल संग मच्छी का भरपेट आनंद लेते।।
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राजेश्वरी ठाकुर
छत्तीसगढ़

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