वैसे तो आती है बड़ी चालाकियां इसको
पर तेरे आगे बच्चा बनने की जिद पे अड़ता है
दुनियाँ की इस भीड़ में हैं रिश्ते नाते बहुत
पर यह बस तेरी चाहत करता रहता है
वो कुछ पागल सा लड़का है
तुझको खोने से डरता है

तेरी हँसी पे अपनी ख़ुशी वार देनेवाला 
खुद के आँसू पलको में बाँधे रहता है
खुद के गम में लड़खड़ा जाने वाला
तेरे लिए इस दुनियाँ से भी लड़ पड़ता है
वो कुछ पागल सा लड़का है
तुझको खोने से डरता है

तेरी इक इक तस्वीर सम्भाल रक्खी है
जैसे उसकी कोई जागीर हो
तुम पास हो या कि दूर बहुत
उसी से बातें करता रहता है
वो कुछ पागल सा लड़का है
तुझको खोने से डरता है

संग तेरे हर पल हँसने वाला
तनहाई में रोता और तड़पता है
तेरे कदमों में फूल बिछाने वाला
"तुम बिन" काँटो पे चलता है
वो कुछ पागल सा लड़का है
तुझको खोने से डरता है

खुद की शक्ल देखे दिन हुए कई
तेरे चेहरे की रंगत भी सालहा 
याद रखता है
वो कुछ पागल सा लड़का है
तुझको खोने से डरता है

है लड़का रो नहीं सकता 
जानता है
कोई जो प्यार से हाल पूछ लें 
फफक के रो पड़ता है
वो एक पागल सा लड़का है
तुझे खोने से डरता है...

           -- दीपक कुमार