नारी हूं
वनीता हूं
जिस रुप में भी पुकारो मुझे मैं पीड़ाहरणी हूं।
शक्ति हूं
बुद्धि हूं
श्रीरूप हूं
जिस रुप में भी पुकारो मुझे मैं कष्टनिवारणी हूं।
ईश्वरी हूं
भुवनेश्वरी हूं
राजराजेश्वरी हूं
जिस रूप में भी पुकारो मुझे मैं संकटहरणी हूं।
चंडिके हूं
कालरात्रि हूं
महिषासुर मर्दिनी हूं
जिस रुप में भी पुकारो मुझे मैं दुष्टसंहारिणी हूं।
जगदंबा हूं
अंबिका हूं
कल्याणी हूं
जिस रूप में भी पुकारो मुझे मैं ममतामयी हूं।
अनंत हूं
अविनाशी हूं
अंतर्यामी हूं
जिस रूप में भी पुकारो मुझे मैं सृष्टिसंचालिका हूं।
मंगलकरणी
आनंदकरणी
दुखः हरणी
जिस रूप में भी पुकारो मुझे मैं शुभफलदायनी हूं।
शिवशक्ति स्वरूपा
अर्धनारीश्वर स्वरूपा
प्रकृति पुरुष स्वरूपा
जिस रुप में भी पुकारो मुझे मैं जगत की पालनकारिणी हूं।
राजेश्वरी ठाकुुर
छत्तीसगढ़

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