शरीर का क्या है केवल नश्वर है,
आत्मा में केवल ईश्वर है,
जिस दिल में प्यार बसा,
उसकी रग रग में नशा,
रात दिन और सुबह शाम,
जुबां पर रहता तेरा नाम,
मन ही मन मैं माला जपती,
शिव शंकर की पूजा करती,
पूजा में देना वरदान,
कभी ना हो मुझको अभिमान
सदा सुहाग बना रहे,
मान सम्मान सदा रहे,
ना इससे ज्यादा देना,
ना इससे कुछ कम देना,
श्रद्धा मन में सदा रहे,
शिव शंकर की कृपा रहे,
करूं प्रार्थना बारंबार,
त्राहि-त्राहि हो रहा संसार,
कृपा करो तुम अपरंपार,
हर लो सारे विषय विकार,
हे शिव शंकर पालनहार,
तुमने तो विष पी लिया था,
फिर विष कैसा फैल रहा है,
रोगी हो चला हर नर नार,
उपचारों के नाम पर---
हर जगह चल रहा है व्यापार,
हे शिव शंकर पालनहार--
कृपा करो तुम बारंबार,
मानव जाति पर कृपा करो,
दे दो हमको बस एक अवसर--
शरीर का क्या है केवल नश्वर है, आत्मा में केवल ईश्वर है।
संगीता वर्मा

2 टिप्पणियाँ