चाँद तू बचपन से 
संग संग चला 
ऐसे जज्बातो मे ढला 

बन गया लोरियो मे 
चंदामामा मेरा 
ढेरो कहानियो मे सुना 
ऐसा दोस्त बन गया ।

जब हुये बडे जरा तो 
शायरी मे रच गया 
इश्क की दास्तां बन गया 
ऐसा आशिक लगा ।

चाँद तू बचपन से 
संग संग चला 
ऐसे जज्बातो मे ढला ।

सात फेरो मे जब मै बंधी 
परिणय मे ,रस्मो मे दिखा 
अटल ध्रुव तारे के संग संग 
भोर के चाँद को भी देखा ।

निर्जला व्रत जब है रखा 
अक्षत रोली से तुझको पूजा 
करवाँ चौथ का चाँद बनकर मिला 
चाँद छलनी से तुझको देखा ।

चाँद तू बचपन से 
संग संग चला 
ऐसे जज्बातो मे ढला ।



        मीनाक्षी शर्मा