ओ मेरे मनमीत,लिया तूने दिलजीत
सुने इस दिल पर, तुम हो मेरे मीत ।।
ओ मेरे मनमीत,न जानू मैं संगीत
पर चाहत में तेरे,गाने लगी मैं गीत ।।
ओ मेरे मनमीत ,न जानू मैं तो गज़ल
हर इक बात पे तेरे,मेरे नैना होते सजल ।।
ओ मेरे मनमीत,न जानू मैं तो कविता
पर चाहत में तेरे ,बन गई तेरी वनिता ।।
ओ मेरे मनमीत,गाते हैं प्यार के गीत
अब तो हर इक स्वर ,लगे मुझे संगीत ।।
ओ मेरे मनमीत, लिया तूने दिलजीत
रहे सदा इस दिल पर बस"तुम्हारी प्रीत" ।।
❤️मनीषा महेंद्र ठाकुर

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