कितने आगे उम्र बढ़ गई
कितनी बदल गई मेरी दुनिया
पर उनको मैं छोटी ही लगती
वो अब तक मुझको कहते गुड़िया

पिता समान ध्यान भी रखते
कभी माँ के जैसा करते दुलार
कभी मित्र बनके मेरी मन की सुनते
ऐसा मेरे बड़े भैया का प्यार

बहुत चिढ़ाते,मुझे सताते
बुरा जो मानूँ तो वो मनाते
मुझसे ज्यादा होते परेशां
जब आंखों में मेरी आंसू आते

अब कमी वक्त की भले ही हो
जीवन की आपाधापी में 
पर मुश्किल घड़ियां होती जब
उन्हें साथ खड़ा ही पाती मैं

मुख पे हो हंसी और दिलमें खुशी
तुम स्वस्थ सुखी सदा रहना
ईश्वर से यही दुआ है करती
भैया तुम्हारी छोटी बहना

✍🏻प्रीति ताम्रकार
      जबलपुर