प्रेम की अनुभूति में ऐसा,
अकसर महसूस हुआ!
बातों से दिल ना भरे तो,
फोन खुद से कटते ही नहीं!!
इंतजार रहता है कि फोन,
उधर से कटे, पर कुछ क्षण,
होने पर भी, ना रखा जाए तो,
मन मसोस कर, मुझे ही ,
रखना पड़ता है!!
वो भी प्रेम की अनुभूति में,
चरम पर हैं शायद, पर,
पर अपनी बँधी मोहब्बत में,
खुद बँधे हुए से हैं!!
लापरवाह, दिखाते रहे खुद ,
को वो, कि उन्हें मेरी,
परवाह नहीं, मगर धड़कन,
उनकी , मुझे एहसास उनका,
कराती रही!!
श्वेता कर्ण

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