झूम उठा फिर आज मेरा दिल, झूम के गाने लगा।
देखके इसको मेरा गम, चुपके से भाग जाने लगा।

मैं पागल था, बेचने खुद को खड़ा एक बाजार में।
देख देख कर, मुसकुराकर, हर खरीदार जाने लगा।

खुद से बातें करते करते थक चुकी अब ज़िन्दगी।
ज़िन्दगी, लगता है  डर, दर्दे दिल फिरसे आने लगा।

डर लगे तो सर उठाऊं, देखूं आकाश में उम्मीदसे।
देता तसल्ली दिलको थोड़ी, फिर सुकूँ आने लगा।

लम्बी लम्बी राह है और ऊस पर अँधेरा काला घना।
खोजमें उजियारोँ  की , दिल ये फिर घबराने लगा।

घूमते थे हम खुशीमें कि  कारवां भी मेरे साथ था।
धन की जब आयी कमी, हरएक जाँ छुड़ाने लगा।



              फिरोज दहिवाला