सरस्, सुन्दर, सुमधुर, 
उत्कृष्ट भाव को लिए, 
गौरव से भरी है, अपनी, 
रश्मिरथी! 

हर कदम पर मुकाम दिया, 
हर किसी को, बराबर, 
सम्मान दिया! 

अपनी बात रखने का, 
एक आयाम दिया! 
ऐसी है, अपनी रश्मिरथी!! 

दिल के भाव का नाम, 
है रश्मिरथी! 
आगे बढ़े, बढ़ती ही, 
जाए, अपनी रश्मिरथी

श्वेता कर्ण!