नया सफर है ,नई मंजिले"
जाने मै ,किस राह चली"
पथ मेरा ,कक्रीट भरा है"
छालो को मै भूल चली"
मंजिल मिलेगी ,ये भी तय है"
चाहे ,बाधा जो -आये"
आसमान"तालाश ही लूंगी"
कितने सपने ,थाम चली""
नही रूकूंगी,नही झुकूंगी"
चाहे अडचन जो ,आये"
हूँ,मै "भारत माँ की बेटी"
अब मै,भर ,उडान चली"
क्षमा मुझे ,करना स्नेही"
शायद ,मै कुछ बोल गई"
अशीर्वाद सदा ही रखना"
सबसे नाता जोड चली""
रीमा महेन्द्र ठाकुर(लेखिका)
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