आप सभी को श्री राम जन्मोत्सव की हार्दिक बधाई
श्री रामजन्म गीत (चैता)
जन्म लिए हैं श्री राम हो रामा मनुष्य के रूपवा।
राजा दशरथ घर जन्मे हैं रामा, चैत्र के महीनवां।
चैत महीना, शुक्ल पक्ष तिथि नवमी,
पुनर्वसु नक्षत्र है,अति शुभ घड़ी।
खड़ी दुपहरिया में जन्में हैं रामा, बाजे आनंद बधइया।
राजा दशरथ के हिय हरषे है,
कौशल्या के नैनों से जल बरसे है।
कैकेई सुमित्रा आनंदे हो रामा, देख ललन के मुँहवाँ।
अयोध्या नगरी आनंदे हो रामा, सुन ललन के जनमवां।
राजा लुटावें अन धन सोनवा,
और मंगावे सोने के पलनवा,
रानी निहारें ललनवा हो रामा, हुलास उठे मनवाँ।
कई नगर से पंडित बुलाए ,
पत्रा ,पोथी बांच के भविष्य बताएं।
सुन के सबके मन अकुलाए,
बारह बरस के लाल होइहें हो रामा, तब जइहें वनवां।
जलाइब पंडित हम तोहरी पोथिया,
और उखाड़ तोहार लंबी लंबी दढ़िया।
विवश, गरीब के लाल हो रामा, कैसे जइहें वनवां।
जइहें तो जइहें बलइया से जइहें,
अपने करतब से तीनो लोक हर्षइहें।
रानी छुटलू बाँझिन के नाम से रामा, लाल लौट घर अइहें।
स्नेहलता पाण्डेय "स्नेहिल"
नई दिल्ली
21/4/2021

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