कल भी खेलते थे खेल आज भी जारी है,
यह किस्मत है किसने बाजी मारी है।
वो मुझे जिताने की जिद तेरी,
मेरे कहने पर क्यों हार जाते आप ,
तेरा प्यार से कहना यह हार सारी जीत से प्यारी है।

तब मैंने समझा सही मायने में जिन्दगी को,
महसूस किया रिश्तों में हार जीत नही रखती मायने,
जो अपनो को हराकर खुश होते वो रिश्ते नही निभाते दुनियादारी है।

नही पाना जीतकर वो महल ऐशो आराम का,
जहां नामोनिशान न हो सुकून एहतराम का,
जहाँ साथ तेरा मिले स्वर्ग से भी सुन्दर वो पनाहगाह हमारी है।

वैसे तो यह जिन्दगी है साहब जिंदादिल रहकर जिओ,
कभी जोर से खिलखिलाओ,कभी आसुँ भी पिओ,
एक सा नही वक्त का पलड़ा कभी तुझपे भारी है कभी मुझपे भारी है।



अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।