पिछले लॉकडाउन तुमने किया था वादा। 
घर का काम करेंगे आधा आधा।
खाने में ना तरह तरह की फरमाइशे करूँगा। 
बनाएंगी दाल रोटी उसी से सब्र मैं कर लूंगा। 

सारे वादे अब के लॉकडाउन में तोड़ दिये।
ना कोई सहायता करते हो।
ना खाने में नुक्स निकालने में कसर छोड़ते हो।
कब सूरज आता है कब तारे बिखर जाते है। 
पूरा दिन काम लगे रहने में ।
वक्त यूँ ही गुज़र जाता है। 

सुनो जी तब पहली पहली बात थी।
अब तो तुम्हे भी आदत पड़ गयी होगी।
अबकी स्थिति ज्यादा भयानक है।
अपना ध्यान रखने के साथ।
एक हेल्प लाईन से भी जुड़ गया हूँ। 
हो जाए किसी का भला ।
बस यही सोच दिन रात लगा रहता हूँ। 

चलो जी कोई बात नहीं। 
इस वक्त मुझसे ज्यादा औरों को जरूरत है 
ऊपर वाले की मेहरबानी सब पर बनी रहे बस।
इससे अधिक कुछ और नहीं चाहिए ।
सबके सही होने तक।

पर मास्क पहनकर अपना भी ।
ध्यान तुम्हे रखना है।
फोन द्वारा मदद करके सांत्वना देकर ।
सबको संभालना भी है।
सब यदि फालतू में बाहर न जाए।
फिर से कोरोना हो जाएगा दाएं बाएं। 
फिर से खुशियाँ खिलेगी।
अपनी रसोई में फिर से सबकी दाल रोटी पकेंगी। 

नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया )🌹🌹
             दिल्ली