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दुनिया का यह मेला अरमानों का बाजार है,
लगता है इन बाजारों में प्यार का व्यापार है,
सच्चे दिलवाले यहां हर पल लुटे जाते हैं,
दिमाग वाले दिल वालों से दिल बड़ा लगाते हैं,
राधा कृष्ण के प्यार को, मोहरा ये ही बनाते हैं,
सच्चे प्यार के जज्बातों का, खेल यही रचाते हैं,
कृष्ण थे रुक्मणी के, राधा थी दिल में उनके,
रुक्मणी ने कृष्ण को चाहा, कृष्ण ने चाहा राधा को,
रुकमणी के प्यार को समझा,राधा को सम्मान दिया,
मानव रूप में जन्म लेकर, प्रेम का एक प्रमाण दिया,
अब समय बदल गया है, इंसान बदल गया है ,
प्रेम का स्वरूप भी बदला ,संसार बदल गया है,
इस युग की राधा का देखो,हाल न जाने क्या हुआ,
कृष्ण कृष्ण करती है देखो, कृष्ण जाने कहां खो गया,
द्वापर में चौसर की मोहरो ने,महाभारत कराया था,
आज शतरंज की मोहरो ने, रंग अपना दिखाया है,
हर दिमाग वाला यह मोहरे, हरदम चलता आया है,
भोले भाले लोगों को, हर दम छलता आया है,
दुनिया के इन बाजारों में, सच्चे दिल बेकार है,
सच्चे दिलवाले यहां ,लूटते बारंबार है,
दुनिया का यह मेला अरमानों का बाजार है,
लगता है इन बाजारों में प्यार का व्यापार है,
संगीता वर्मा✍✍

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