हे नाथ मेरे महादेव प्रभू,
जग तेरा कृपाला है...
डम-डम के गूँज से जागे,
बाघम्बर बैठे शिवाला है...
हे नाथ मेरे......
हे रुद्र प्रकोप के अग्नि से,
नित्-नींव प्रभू अर्न्तध्यान हुये...
खग-कृपाल छोरि नाचन जावे,
फन ललाट महाकाल बने...
हे नाथ मेरे......
हे नटवर तुम महारुद्र हो,
मोहे नाथ निकेतन शिक्षा दें...
छन्य अपराध मेरे कोर करो प्रभू,
होहीं सहाय सहज,हमें भिक्षा दें...
हे नाथ मेरे......
अब विलंब नहीं किजै महेश,
मैं अपनी शीश तुझे चढ़ाऊँ...
होहीं प्रसन्न प्रभू आशुतोष तब,
नीत सेवा-गान सुनावहूँ...
हे नाथ मेरे......
रावण बने अब भाग्य दशानन,
दस शीश मुख से जुड़े...
थर-थर काँपे,पृथ्वी हहाकार से,
जब रावण विकराल रूप धरे...
हे नाथ मेरे......
लेखक:-विकास कुमार लाभ
मधुबनी(बिहार)

1 टिप्पणियाँ