तुमने हमसे जब गुफ्तगूँ की तो ऐसा लगा
मेरे अंदर जो रोशनी है वो रोशनदान तुम ही हो!
मुझे मालूम है तुम्हें भी है हमसे मुहब्बत
तो इजहार कर दो समेट लो हमें अपनी
मोहब्बत के आगोश में
मेरे टूटे हुये सितार की झंकार तुम ही हो!
मौज कस्ती मेरी डगमगाने लगे
लहरों से जो टकराये वो पतवार तुम ही हो!
मैं तुमको भुला दूँ ये मुमकिन नहीं
मेरे टूटे होंसलाओं उड़ान तुम ही हो!
तुम मेरे हमराह न बन सके ये अफसोस हमें
जो हर राज जानते हो मेरे हमराज़ तुम ही हो! ही
'हनुमान कुमार'

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