मुस्कुराइए कि आप अपने घर में हैं !
अपनों के बीच हैं उनकी नजर में हैं !
यहां तो कितनी नजर के नूर खो गए ,
बेवजह क्या निकले घर से दूर हो गए !
मुस्कुराइए की जीवन के सफर में हैं !
अपनों के बीच है उनकी नजर में हैं !
मुस्कुराइए .................
दिखावे का दौर है नहीं, दिल से रिश्ता निभाइए ,
दो गज की दूरी में सही, दिल से करीब आइए !
मुस्कुराइए की साथ चारों पहर में हैं !
अपनों के बीच हैं उनकी नजर में हैं !
मुस्कुराइए............
प्राण वायु की भी हो रही कालाबाजारी ,
देवदूत बन गए हैं, आज तो बड़े व्यापारी !
मुस्कुराइए की प्राण वायु के असर में हैं !
अपनों के बीच हैं उनकी नजर में हैं !
मुस्कुराइए .............
है इम्तिहान की घड़ी,चुनौतियां भी हैं बड़ी !
खाली बटुआ,खाली जेब, खर्चों की लंबी लड़ी !
मुस्कुराइए की खुशियां तो शिफर में हैं !
अपनों के बीच हैं उनकी नजर में हैं !
मुस्कुराइए ......
मुस्कुराइए कि आप अपने घर में हैं !
अपनों के बीच है उनकी नजर में हैं !
......✍️ पिंकी मिश्रा
भागलपुर , बिहार

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