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हम मिथिला के बेटी छी, 
बहुत हमर अरमान यौ! 
कतेक स्वप्न छल नयन म भरल, 
कोना करु बखान यौ! 

किसान पिता के सर हम ऊँचा करब, 
माँ के आंचल, हम खुशी स भरब! 
दीन दुखी के सेवा करब, 
करब सभक कल्याण यौ, 
कतेक स्वप्न छल नयन म भरल, 
कोना करू बखान यौ! 

आकाश म उड़ेत पंक्षी क  देख, 
पानी म तेइरत मछली क देख! 
स्वतन्त्र जीवन के चाहत भेल, 
" उड़ ब"हमहु आसमान यौ! 
कतेक स्वप्न छल नयन म  भरल, 
कोना करू बखान यौ! 

समाज म व्याप्त कुरुति देखलो, 
घर के अजबे रीति देखलो, 
देखलो लड़की पर होइए अत्याचार, 
जे क रहल ई संसार! 
ई सब लेल हम, करब,कुछ समाधान यौ, 
कतेक स्वप्न छल नयन म भरल, 
कोना करू बखान यौ! 


विदेश में मिथिला पेंटिंग धूम मचेन, 
मैथिल पान, मखान यौ, 
"सीता" हमर बहिन कहावै, 
हमर पाहुना राम यौ, 
हम "मिथिला" के बेटी छी, 
बहुत हमर अरमान यौ! 
बहुत हमर अरमान यौ! 
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श्वेता कर्ण