जिंदगी कुछ तो रहम कर देती
इंतजार के कुछ पल कम कर देती ।।
कब तक समझाएं इस दिल को,
तेरी यादें आंखों को नम कर देती !!
हमेशा इन चांदनी रातों को ही तोहमत क्यों लगते हो,
दिन के उजाले भी तो तेरी याद बन के आते है!!
सांसों में बसी हर एक बात ,तेरे साथ होने की,
काम आती नहीं कोई तरकीब तुझे भूल जाने की !!
कैसे उन लम्हों को मै भुल जाऊं ,
गुपचुप छुपी बैठी यादों से ही दिल को बहलाऊं!!
आंखों की नमी से फिर तेरी तस्वीर भीगी है,
झलकते आंसुओं में तुम बाहर ना आ जाना !!
सजाया है तुम्हें चारों तरफ बेख़ौफ़
किसी की नजर ना पड़ जाए हमारे आशियाने पर!!
सलामत रहें ये दूरियां,ये मिलने की मजबूरियां,
तेरी यादें,तेरे शहर को खुद मेरे पास ले आती हैं !!!
कीर्ति चौरसिया
जबलपुर ( मध्य प्रदेश)

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