विद्यालय में कलेक्टर का प्रवेश होता है, सभी अपनी कक्षाओं से झांककर उनकी एक झलक देखने का प्रयत्न कर रहे है, प्रिंसिपल सर, विद्यालय के ट्रस्टी श्री विद्यासागर जी अपने पोते( मोहित) के साथ कलेक्टर मैडम की तरफ बढ़ रहे है| आराधना और रीतु मैडम भी उनके स्वागत के लिए पीछे चल रहे है|)
सफेद साड़ी में सादगी भरे अंदाज में कलेक्टर सुनीता जी का आगमन हो रहा है, 26-27 कि उम्र में इस पद पर पहुँच जाना उनके प्रतिभावान व्यक्तित्व कि निशानी थी| सभी उनको देखकर बहुत खुश होते है, दूसरी तरफ मोहित किसी भी तरह आराधना की स्पीच को लेने के लिए अवसर की तलाश में है, औपचारिकताओं के बीच रीतु मैडम आराधना को तिलक करने का इशारा करती है जैसे ही आराधना आगे बढ़ती है, उसका पाँव फिसल जाता है और वह गिर जाती हैं, पास खड़े मोहित को तो जैसे इसी अवसर का इंतजार रहता है वह झट से उसे उठाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ा देता है| यह सब आराधना समझ नहीं पाती है वह उसका हाथ थामकर खड़ी हो जाती है, उसे खबर ही नहीं रहती की कब उसके हाथ से स्पीच वाला कागज नीचे गिर जाता है, मोहित उसी मौके का फायदा उठाकर वह कागज जल्दी से अपनी जेब में रख लेता है|)
रीतु मैडम- क्या कर रही हो आराधना, इतना डर क्यों रही हो तुम...? चलो अभी तिलक लगाकर आरती करो|
आराधना- जी...
( आराधना के चेहरे पर अजीब सी घबराहट साफ नजर आ रही है, आज पहली बार उसे किसी का स्वागत करने का मौका मिला था वह अपने चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश कर रही थी, तभी उसकी नजर अचानक मोहित पर जाती है, वह उसे देखकर मुस्कुराता है ओर आगे आने का इशारा करते हुए खुद भी माला लेकर आगे बढ़ता है| उसे देख आराधना को आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती है मन ही मन वह समझती है की यह लड़का इतना भी बुरा नहीं है)
आराधना तिलक लगाते हुए- मैडम हमने आपके बारे में बहुत पढ़ा है, मुझे भी आपकी तरह जीवन में कुछ बनना है, हमारे विद्यालय में आपका आगमन हम सबके लिऐ बहुत सौभाग्य की बात है|
( कलेक्टर मैडम उसकी बात पर मुस्कुरा देती है|)
मोहित माला पहनाते हुए- यस मैडम, हमारे विद्यालय में आपका स्वागत है|
विद्यासागर जी- मैडम जी, यह मेरा पोता है मोहित इसी विद्यालय में पढ़ता है बहुत ही होशियार और मेहनती बच्चा है|
सुनीता जी- जी बिल्कुल आप पर ही गया है तब तो, आपका नाम बहुत रोशन करेगा ये, चलो अन्दर चलते हैं|
सभी अन्दर की और प्रवेश करते है लेकिन आराधना मोहित को देखती रहती है, उन दोनों के बीच बातचीत के कुछ पल....
मोहित- क्या हुआ ऐसे घूर क्यों रही हो..? कहीं तुम ये तो नहीं सोच रही की मेंने तुम्हारी मदद क्यों की...! अगर तुम ऐसा सोच रही हो तो एक बात बता दूं, मोहित कुछ भी बिना मतलब के नहीं करता, थोड़ी देर में तुमको सब पता चल जाऐगा|
आराधना- जब भी मैं तुमको थोड़ा सा भी अच्छा समझने की कोशिश करती हूँ तुम फिर से कुछ ऐसा कर देते हो जिससे मैं यह सोचती हूँ जैसे मैं तुम्हारी पिछले जन्म की कोई दुश्मन रही हो|
मोहित- क्या पता इस जन्म में भी यही हो.... तो मुझसे थोड़ॎ बचकर रहना, क्या पता कब कौनसा हादसा हो जाऐ.... अब जाओ मुझे और भी काम है|
( आराधना गुस्से में वहाँ से चली जाती है, पर उसके मन में उसकी कही बातें घर कर जाती है|)
कुछ समय बाद.......
(स्टेज पर कलेक्टर मैडम, प्रिंसिपल, ट्रस्टी अपनी कुर्सी पर बैठे है, कार्यक्रम का संचालन अमन सर कर रहें है| शुरुआत में आराधना का स्पीच होना होता है लेकिन मोहित कार्यक्रम की लिस्ट में फेर बदल कर अपना नाम पहले करवा लेता है, जब मोहित स्टेज पर पहुँचता है और अपनी (आराधना की) स्पीच पढ़ता है, आराधना अपनी स्पीच को उसके द्वारा पढ़ते देख दंग रह गई, उसके सामने वह दृश्य घुमने लगा जब मोहित ने उसे सहारा देकर उठाने की कोशिश की थी, तभी सपना आराधना के कंधे पर हाथ रखती है)
आराधना- यह सब मोहित ने एक स्पीच के लिऐ किया, मेंने सोचा था की ये मेरी मदद कर रहा है,दिल का बुरा नहीं होगा, पर यह ऐसी हरकत करेगा ये उम्मीद नहीं थी... उसे स्पीच ही चाहिए थी तो मुझसे बोल देता मैं खुद उसे लिखकर देती, पर इस तरह से चुराकर उसने अच्छा नहीं किया|
सपना- इतनी अकड़ भरी पड़ी है इसमें, यही सब तो आता है इसे, खुद का कोई हुनर नहीं है इसका, इस बार तो इसने हद ही कर दी, चल अभी सबको बताते है,इसके दादा जी को भी तो पता चलें कि ये कितना मेहनती और होशियार है|
आराधना- नहीं यार, इससे बेइज्जती तो अपने विद्यालय की ही होगी ना, कोई बात नहीं इसके मुँह से ही सही मेरी बातें कलेक्टर मैडम तक पहुँच गई वो भी तो कितना अच्छा हुआ, वरना मैं तो इतने अच्छे से बोल ही नहीं सकती थी|
सपना- यार तु कितनी अच्छी है, हर चीज में कुछ न कुछ अच्छा ढूँढ़ ही लेती है, लेकिन यह सही नहीं है यह लड़का ऐसे ही चीटींग करता हुआ हमेशा खुद दूसरों की नजर में अच्छा बन जाता है|
आराधना- कोई बात नहीं यार, अपनी लिखी बातें जब कोई और पढ़ के सुनाता है तो, एक हिम्मत मिलती है की हमारी सोच लोगों पर कितना असर डालती है|
सपना- वो सब तो ठीक है पर अब तू क्या बोलेगी...?
आराधना- मेंने सुनीता जी के बारे में बहुत से किस्से पढ़े है, और कल भी तो हमने कितना सर्च किया था, तू चिन्ता मत कर, जो होता है अच्छे के लिए ही होता है, मोहित की स्पीच से मुझे बहुत हिम्मत मिली है, पहले में सोच रही थी, कि सबको मेरी स्पीच पसंद भी आऐगी या नहीं, पर देखो मेरी लिखी स्पीच पर सब कितनी जोर जोर से तालियां बजा रहे है, अभी चलो मेरी बारी आने वाली है|
( मोहित अपनी स्पीच पूरी कर मंच से नीचे उतर रहा होता है इस बीच आराधना मोहित को बहुत खुशी से देखती हुई ऊपर चढ़ती है, आराधना को इतना खुश देखकर मोहित सकपका जाता है, शर्म से वह अपनी नजर नीचे कर वहाँ से चला जाता है लेकिन कहीं न कहीं उसकी खुशी मोहित को बर्दाश्त नहीं होती, उसकी उम्मीद से हटकर किसी ने उसकी इस हरकत पर नारजगी कि जगह खुशी जाहिर की थी| उसका वही खुश चेहरा मोहित को खटकने लगता है....
क्रमश:

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