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Sangita Verma
दोहे
दोहे
जुलाई 25, 2021
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
प्रेम रोग में बाबरी,।
खत लिखे दिन रैन,।
पिया को देखत सावरी,।
छत पर लागत नैन,।।
लत बुरी है प्रेम की,।
मन में उठता पीर,।।
प्रेम के रंग मैं रची,।
मन हो गया कबीर।।
संगीता वर्मा, ✍️✍️
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4 टिप्पणियाँ
Unknown
ने कहा…
वाह!बहुत सुन्दर प्रस्तुति है आपकी
Diwa Shanker Saraswat
ने कहा…
बहुत सुंदर प्रस्तुति
Sangeeta verma
ने कहा…
Thankyou
Sangeeta verma
ने कहा…
Thankyou
4 टिप्पणियाँ