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मैं कश्ती हूं समंदर की ,तुम मेरे हो पतवार प्रिय!!
मैं सीता सी शती ,तुम मर्यादा पुरुषोत्तम राम प्रिय!!
मैं द्रौपदी की लज्जा सी ,तुम कान्हा की सुर्दशन वाण प्रिय!!
मैं ब्रह्मा के कमंडल से निकली गंगा, तेरा भगीरथी नाम प्रिय!!
मैं तो बस मिट्टी की मूरत ,तुम उसमें बसे मेरे प्राण प्रिय!!
मैं मीरा सी दासी तेरी, तुम मेरे बने आराध्य प्रिय!!
मैं विष्णु की निंद्रा सी, तुम लक्ष्मी की प्रेम परिधान प्रिय!!
मैं दक्ष की अग्नि में जली सती, तुम मेरे वैराग्य शिव प्रिय!!
मैं वीणा की संगीत सी, तुम शिव की सातों राग प्रिय!!
मेरे रोम रोम में बस तुम ही बसे, मेरा अस्तित्व तुम ही अभिमान प्रिय!!
प्रीति वर्मा

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