शादी से पहले की बात हैं , मैं , बुआ जी के घर गई थी , कुछ दिनों के लिए , उस समय खाना बनाना नही आता था , लेकिन शौक जरूर लगा था , इसलिए कुछ ना कुछ बना कर देखती रहती थीं , बुआ जी ने कहा चल आज सूजी का हलवा बनाते हैं ,मैं बताती रहूँगी , तू बना लेना ,मैने कहा ठीक हैं , वो रसोई के बाहर बैठ गई ,कुर्सी डालकर ,और मैने हलवा बनाना शुरू किया , बुआ जी बताती रही , मैं वैसे ही करती रही ,सब ठीक ही चल रहा था ,चीनी के डब्बे में चीनी कम थी ,पूछा तो , बुआजी ने बताया, चीनी दरवाजे के पीछे एक बड़े डब्बे में हैं , अब ये नही बताया किस तरफ वाले डब्बे में हैं ,क्योकि दरवाजे के पीछे दोनों तरफ ही टीन के बड़े - बड़े डब्बे रखें हैं , जिसमे राशन भरा हुआ हैं , बस सारी गड़बड़ यही हो गई , और बिना देखें चीनी की जगह चावल डाल दिए , जब डालकर हलवा चलाया तो देखा , अब क्या कर सकते हैं , मैने बुआ जी को कहा ,लो खा लो हलवा ,
खुश होकर बोली , लायेगी तब ना ,
अभी ले आती हूँ .... मैने भी प्लेट में डालकर दे दिया , देखते ही ...
बुआ जी ...
अरे ....ये क्या हैं ,
मैं…....
हलवा ....
बुआ जी ...
ऐसा होता हैं क्या , हलवा ...
ये क्या डाल दिया इसमें ...
मैं ....
चीनी ....
बुआ जी ....
चीनी कम , चावल ज्यादा लग रहें हैं ,
मैं ....
चावल ही हैं ,
आपने ये तो बताया नही कौन सी तरफ के डिब्बे से लेना हैं ,मैंने बिना देखें डाल दिया ,
बस फिर क्या था , दोनों खिलखिला कर हँस पड़ें ,
आज भी जब हलवा बनाती हूँ ,तो उस हलवे की याद आ जाती हैं .....
.........@ नेहा धामा " विजेता "

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