तुम्हें देख कर मदहोश हो जाए दिल,वो दिलकश शराब हो तुम।
जिसे पीकर फिर होश न आए,वो महकता शबाब हो तुम।।
तुम्हें नहीं पता, बहार ए गुलशन का वो खूबसूरत गुलाब हो तुम।
रोशन जिस से जहान है, वो आफताब हो तुम।।
लिखा खुदा ने जिसे,वही किताब हो तुम।
हसीं चेहरे से नकाब हटा लो,बहुत लाजवाब हो तुम।।
जिससे महकता मेरा जहां हो,प्रीत वो ख्वाब हो तुम।
आशिक हूं तुम्हारा,मेरे हर सवाल का जवाब हो तुम।।
हरप्रीत कौर
दिल्ली

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