काफिया - आना 
रदीफ़ - होता है 


बेकरार तेरे प्यार में मस्ताना होता है, 
हुस्न का कायल दीवाना होता है। 

तेरे चेहरे की चांँद का तसव्वुर ऐसा, 
फिजाओं में फैला मयखाना होता है। 

पूछ रहा हर शय पता हाले दिल का, 
तेरी धड़कन में ही अब ठिकाना होता है। 

हर ख्याल रुके तुझ तक ही जाकर, 
भटके नैन मेरे जहाँ,जाने जानां होता है। 

जुस्तजू इतनी"झा",बन जाऊँ जीनत तेरी, 
लिखता हूँ जो ग़ज़ल तेरा ही तराना होता है। 
आरती झा(स्वरचित व मौलिक) 
दिल्ली 
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