कृष्ण होना आसान नहीं,कृष्ण के कुछ मायने हैं।
विष्णु का अवतार कृष्ण,शक्ति सामर्थ्य मायने हैं।
प्रथम गाली पर ही, सर काटने की शक्ति जिसमें।
99गालियों का श्रवण,सामर्थ्य रखे वही कृष्ण है।
सुदर्शन जैसे शस्त्र हाथ में, होने के बाद भी यदि।
हाथ मे हमेशा मुरली है तो,वही कृष्ण है कृष्ण है।
द्वारिका नगर का यश वैभव,होने के बावजूद भी।
जिसका बाल सखा मित्र,सुदामा हो वही कृष्ण है।
मृत्यु के फन शेषनाग पर,खड़ा रहे निर्भीक अगर।
बंसरी बजा के करे नृत्य,तो वही कृष्ण है कृष्ण है।
सर्व सामर्थ्य होने पर भी,अहं से कोसों दूर रहे एवं।
पांडव रथ का सारथी, बन रथ हाँके वही कृष्ण है।
उंगली के चोट में, द्रौपती ने वस्त्र फाड़ पट्टी बाँधी।
दुशासन चीर हरे तो,द्रौपती लाज रखे वो कृष्ण है।
राज सिंहासन पर बैठा,यदि कोई राजा है फिरभी।
मित्र के आनेकी खबर से,नंगेपैरों दौड़े वो कृष्ण है।
महल में भरे कर्मचारियों,दास दासियों के होने पर।
बालसखा के पैरों को,अश्रु से धोए तो वो कृष्ण है।
छप्पन भोग को करने वाला,धन धान्य से भरा हुए।
साग विदुर घर खाये तो,वह कृष्ण है वही कृष्ण है।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

1 टिप्पणियाँ
आपकी कविता की कुछ पंक्तियां कल मेरी एक सहेली ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में डाली थी🙏🏻🙏🏻🙏🏻