सुबह तो रोज ही होती थी ,लेकिन आज की सुबह कुछ खास थी,मीरा जी के झुर्री भरे गालों की सुर्खी ,और खुद में बेवजह मंद मंद मुस्कुराना जैसे  किसी भूली यादों ने मंद पवन की तरह छू दिया हो।

आज क्या बात है ,मेमसाब बहुत खुश नजर आ रही हैं ?_झाड़ू करते सोनी ने पूछा।
अरे कुछ नहीं ,कोई पुरानी बात याद आ गई।साहब तो ड्यूटी चले गए ,पहले मेरे लिए और खुद  के लिए  चाय बना ले ,थोड़ी देर बाद झाड़ू कर लेना।

जी मेमसाब _ आश्चर्य से देखती सोनी झाड़ू रख ,किचन में चाय बनाने चली गई।
मन ही मन सोच रही थी,इतने दिनों में तो इन्हें कभी इतना खुश नहीं देखा।
चाय लेकर ,वह मीरा के पास आकर बैठ गई।
चाय की चुस्की लेते दोनों शांत थीं।
मन में आज कई जज्बात बादलों की तरह अंदर घुमड़ रहे थे।

सोनी चाय का कप उठा ले गई और अपने काम में लग गई ।
सोनी के जाने के बाद मीरा  ड्रेसिंग टेबल के पास बैठ गईं, खुद को  आज सालों बाद आइने में  ठीक से निहारा था।
आंखें अब उम्र के हिसाब से थोड़ा गड्ढे में चली गई थी ,बालों की सफेदी ,मेहंदी से छुप गई थी ,शरीर अब बेडौल और थुलथुला हो गया था फिर भी इतना नहीं , कुल मिला कर   ठीक ठाक ही लग रही थी।

शादी होकर जब से आई थी पति को फुर्सत ही नहीं थी कि, कभी उसके लिए दो शब्द उसकी तारीफ के  ही बोल दे, हां अगर खाने में कोई कमी हो गई ,तो जरूर उसकी शामत आ जाती।
दो बच्चों को पालते कब बालों में सफेदी आ गई पता ही नहीं चला ।

बच्चे भी परिंदे की तरह उड़ गए,नया बसेरा बनाने के लिए  ।  पहले रिश्तेदारों की फौज भी उसके घर जब _तब धमक जाया करती थी ।लेकिन अब उनका भी आना जाना कम हो गया ,सब अपनी अपनी गृहस्थी ,काम काज में मशगूल हो गए ।कभी कभार फोन पर बात हो जाती । बस अब रह गई वो और उसकी तन्हाई।
कल ही उसने सोशल मीडिया पर अपना अकाउंट बनाया था,सोचा शायद पुराने दिनों के इष्ट मित्र मिल जाएं थोड़ा मन बहल जाएगा।

रात में कई लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट आ गई।रिया ,रचना हाय,ये तो वैसे की वैसी  दिख रही  हैं ,जैसे कॉलेज के टाइम दिखती थीं ,मुझे भी अपने उपर ध्यान देना होगा ,सोच कर लेटने गई पतिदेव तो पहले ही खर्राटे मार कर सो रहे थे।

सुबह हुई ,सबसे पहले फोन देखा किसी और दोस्त की तो फ्रेंड रिक्वेस्ट नहीं आई।
देखा तो धक्क कर गया दिल,उसकी आंखें जो देख रही थीं,उसे विश्वास नहीं हो रहा था,उसके पहले  प्यार का फ्रेंड रिक्वेस्ट था।
उसे एक दम विश्वास नहीं था कि वो उसे माफ कर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजेगा।
तभी पतिदेव की आवाज कानों में गूंजी ,घड़ी देखा तो 6 बजे थे,पतिदेव सुबह की सैर कर लौट चुके थे ,अब उन्हें चाय और अखबार की तलब थी।
मीरा  जल्दी जल्दी फोन छोड़ किचन की ओर भागी ।चाय का पतीला चढ़ा,वह नाश्ते के लिए कुछ खोजने लगी ,क्या बनाऊं ,फिर 10 बजे तक खाना भी देना है ,सुबह की भाग दौड़ में वह सब कुछ भूल जाती थी,लेकिन आज उनका बार बार मन कर रहा था ,जाकर एक बार फोन देख लूं ,उसकी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लूं। उनका मन रसोई में नहीं लग रहा था।
चाय देकर वह एक बार फोन लेकर बैठ गई और रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लिया।
अब इंतजार था अमित के मैसेज आने  का।

ड्रेसिंग टेबल से उठने के बाद उसने पार्लर वाली से अपाइंटमेंट लिया,फेशियल,मेनीक्योर,पेडिक्योर,हेयर कट।
पूरे दिन का समय सिर्फ अपने लिए ।
फोन लगातार देखती रही ,लेकिन कोई मैसेज नहीं।
अगले दिन वह पति के साथ सैर पर जाने को तैयार हो गई ,पति को उसे देख सुखद आश्चर्य हुआ।
वहां से आकर फिर अपनी दिनचर्या ।नई नई सहेलियां मिल रही थीं,पुराने मित्रों से मिलकर एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा था। उसने अपने मोटापे को कंट्रोल करने के नुस्खे अपनाने शुरू कर दिए।

10 दिन तक अमित का कोई मैसेज नहीं आया,अब धीरे धीरे उन्हें  लगा कि लगता है उसका मैसेज नहीं आएगा।
लेकिन अब उनका दिन अच्छे से बीतता ,पुराने दिनों को याद कर सभी सहेलियां खूब हंसती।
15 वें दिन आखिर अमित का संक्षिप्त मैसेज आया।
हैलो मीतू
(अमित उन्हें प्यार से मीतू ही बुलाता था)।
कैसी हो?
क्षमा चाहता हूं बाहर ड्यूटी में होने के कारण तुम्हें संदेश भेज नहीं पाया।

क्रमशः