मुबारक हो प्रियतम
आज जन्मदिन विवाह का
मीठी नोंकझोंक का
प्रेम के प्रवाह का

मांग सजाई सिंदूरी
लेकर फेरे सात
वचन दिया जीवन भर
न छूटेगा अपना साथ

अठारह वर्षों की यात्रा में
कुछ कठिन मोड़ भी आए
कभी आपसी समझ की कमी हुई
कई बार विचार टकराए

पर अपने प्रेम का पुष्प प्रिय
कभी नही मुरझा पाया
कभी हम झुक गये, कभी तुम झुके
हर बार सीखा एक सबक नया

तेरे प्यार का मिला संबल
जब आंखों में आँसू आये
जब गम का छाया अंधेरा
तुम खड़े थे आस दीप जलाए

तुम भी दिल मेरा लगे कहीं न
संग हमेशा रहना हमदम
हर उम्र तेरे लिए सजती रहूँ मै
है ख्वाहिश रहूँ सदा सुहागन

      प्रीति ताम्रकार
       जबलपुर